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Remembering a very dear brother on his 112th birthday today. He was slim, fair and handsome as one can be & eldest amongst us all. Much loved and admired by all, his life was one of complete dedication and sacrifice. He shared his affection amongst us so much that it still warms our hearts. We treasure his birthday today and will celebrate it with much love. Dear Batchappa, you are still with us today and still lighting up our lives. Thank you, Appa!
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A note from Ajay

राधाम्मा का आखिरी पड़ावमाँ मेरे अकेलेपन के बारे में सोच रही हैमेरी शादी में बहुत देरी हो गई थीपर हो भी सकती है किसी भी समयमुझे वापस जाना हैऔर माँ जानती है कि मुझे वापस जाना हैयह तय हैकि मैं वापस जाऊँगा तो माँ को भूल जाऊँगाजैसे मैं भूल जाऊँगा उनकी थाली कटोरीउनका गिलासवह नीली साड़ी जिसमें जरी की किनारी हैमैं एकदम भूल जाऊँगाजिसे इस समूची दुनिया में माँऔर सिर्फ मेरी माँ पहनती है।उसके बाद सर्दियाँ आ जाएँगीऔर मैंने देखा है कि सर्दियाँ जब भी आती हैंतो माँ थोड़ा और झुक जाती हैअपनी परछाईं की तरफऊन के बारे में उसके विचारबहुत सख्त हैमृत्यु के बारे में बेहद कोमलपक्षियों के बारे मेंवह कभी कुछ नहीं कहतीहालाँकि नींद मेंवह खुद एक पक्षी की तरह लगती हैजब वह बहुत ज्यादा थक जाती हैतो उठा लेती है सुई और तागामैंने देखा है कि जब सब सो जाते हैंतो सुई चलाने वाले उसके हाथदेर रात तकसमय को धीरे-धीरे सिलते हैंपिछले दस बरसों सेएक सुई और तागे के बीचदबी हुई है माँहालाँकि वह खुद एक करघा हैजिस पर दस बरस बुने गए हैंधीरे-धीरे तह पर तहखूब मोटे और गझिन और खुरदुरेदस बरसतो मैंने सभी से कहामां,मां का खयाल रखनाउन्हे सिर्फ तमिल बोली ही भाती है।अगर नुंगमबक्कम से गुज़रोतो हों कर खामोशउनके स्वर को सुनने की कोशिश करनाउनके सहज हास्य विनोद की प्रवृत्ति याद हैपर हमारी स्मृतियां अब धूमिल हो रही हैं।🙏🌷🙏🌷🙏🌷

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